आधे किमी से ज्यादा दूर पहाड़ पार कर पानी लाते संरक्षित जनजाति कोरवा परिवार, आज भी शुद्ध जल से वंचित



कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद के ग्राम पंचायत सरईगहना का कोरवापारा… जहां आज भी ज़िंदगी हर सुबह पानी की जद्दोजहद से शुरू होती है। संरक्षित जनजाति कोरवा के 13 परिवार यहां निवास करते हैं, लेकिन विडंबना ये है कि इन्हें आज तक शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाया। गांव में लगा एकमात्र हैंडपंप लाल पानी उगलता है, जो पीने लायक नहीं है।

प्यास बुझाने के लिए इन परिवारों को करीब आधा किमी से ज्यादा दूर पहाड़ी पार करना पड़ता है… फिर गेज नदी के किनारे बने एक पोखर से पानी निकालना पड़ता है। इस पानी को पहले कपड़े से छाना जाता है, फिर सिर पर ढोकर लंबा सफर तय करते हुए घर तक लाया जाता है। महिला, पुरुष और छोटे-छोटे बच्चे—सब मिलकर रोज़ यही संघर्ष करते हैं।

सबसे बड़ी बात ये है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद यहां न तो साफ पानी की व्यवस्था हो पाई है और न ही जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन पहुंच पाया है। झोपड़ीनुमा घरों में रहने वाले ये कोरवा आदिवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं… सवाल ये है कि आखिर कब तक?



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