बैकुंठपुर शहर में इन दिनों बाइक और स्कूटी से स्टंट करना एक खतरनाक “फैशन” बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि इस जानलेवा खेल में अधिकतर नाबालिग बच्चे शामिल हैं, जिन्हें न तो ट्रैफिक नियमों की समझ है और न ही अपनी जान की परवाह। रोज़ाना शहर की सड़कों, चौक–चौराहों, मुख्य मार्गों और रिहायशी इलाकों में ये नाबालिग तेज रफ्तार बाइक से वन-व्हीलिंग, स्टैंड, ज़िगज़ैग ड्राइविंग और रेसिंग करते नजर आ जाते हैं।
यह स्थिति अब केवल शरारत या लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का रूप ले चुकी है। सड़कें जो आम नागरिकों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए होती हैं, आज स्टंटबाज़ों के अखाड़े में बदलती जा रही हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ये स्टंट करने वाले अधिकतर 18 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही वाहन चलाने की कानूनी अनुमति। इसके बावजूद खुलेआम सड़क पर कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि इन नाबालिगों को बाइक आखिर मिल कैसे रही है? क्या माता-पिता अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ चुके हैं, या फिर उन्हें इस खतरे का अंदाज़ा ही नहीं है?
बाइक स्टंट केवल स्टंट करने वाले की जान के लिए खतरा नहीं है, बल्कि सड़क पर चल रहे हर आम नागरिक के लिए मौत का खुला निमंत्रण है। एक छोटी-सी चूक, एक पल का संतुलन बिगड़ना और किसी निर्दोष की जान जा सकती है। इसके बावजूद स्टंटबाज़ों के हौसले बुलंद हैं, क्योंकि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही पुलिस कार्रवाई का।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार दिनदहाड़े और शाम के समय स्टंट होते हैं, वीडियो बनाए जाते हैं, सोशल मीडिया पर डाले जाते हैं, लेकिन न कोई सख्त कार्रवाई होती है, न कोई स्थायी डर पैदा किया जाता है। कभी-कभार की गई हल्की-फुल्की कार्रवाई से स्टंटबाज़ों का मनोबल और बढ़ जाता है।
यह स्थिति सीधे तौर पर यातायात पुलिस, स्थानीय प्रशासन और थाना स्तर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। क्या पुलिस को इन जगहों की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? जब आम जनता सब देख रही है, तो जिम्मेदार विभाग कैसे आंखें मूंदे बैठा है?
सिर्फ पुलिस ही नहीं, माता-पिता की भूमिका भी कटघरे में है। आज के समय में मोबाइल, रील और सोशल मीडिया की दुनिया ने बच्चों को गलत दिशा में धकेल दिया है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि अभिभावक अपने बच्चों को बिना लाइसेंस बाइक सौंप दें। एक पल का शौक पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर सकता है।
यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में बैकुंठपुर किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। तब सवाल सिर्फ “किसकी गलती थी” का नहीं रहेगा, बल्कि “क्यों नहीं रोका गया” का होगा।
अब जरूरत है कठोर और लगातार कार्रवाई की—
नाबालिग स्टंटबाज़ों की पहचान कर उनके अभिभावकों पर जुर्माना
बाइक जब्ती और लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया
स्कूल–कॉलेज स्तर पर ट्रैफिक जागरूकता अभियान
सोशल मीडिया पर स्टंट वीडियो डालने वालों पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई
नियमित पेट्रोलिंग और संवेदनशील इलाकों में चेकिंग
बैकुंठपुर की सड़कों को स्टंट का मैदान बनने से बचाना होगा। कानून का डर, समाज की जिम्मेदारी और प्रशासन की सक्रियता—तीनों मिलकर ही इस खतरे को रोक सकते हैं।
अब भी वक्त है, नहीं तो अगली खबर किसी हादसे की होगी… और तब पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा।

