बैकुण्ठपुर नगर पालिका क्षेत्र में ठेकेदार की मनमानी चरम पर, खराब स्ट्रीट लाइटों से अंधेरे में डूबे वार्ड


बैकुण्ठपुर नगर पालिका क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के कई वार्डों में लगी स्ट्रीट लाइटें या तो महीनों से खराब पड़ी हैं या फिर पूरी तरह बंद हैं। इससे रात के समय आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है, वहीं असामाजिक तत्वों के हौसले भी बुलंद होते नजर आ रहे हैं।

नगरवासियों का कहना है कि स्ट्रीट लाइट लगाने और उनके संधारण का कार्य जिस ठेकेदार को दिया गया है, वह अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़े हुए है। नियमों के अनुसार नगर पालिका द्वारा किए गए स्ट्रीट लाइट अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान है कि स्थापना की तिथि से तीन वर्षों तक लाइट खराब होने या बंद होने की स्थिति में संबंधित ठेकेदार को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के तत्काल मरम्मत करनी होती है। इसके बावजूद शिकायतों के बाद भी न तो लाइटें ठीक हो रही हैं और न ही ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार को किसी न किसी स्तर पर राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण नगर पालिका अधिकारी भी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। कई वार्ड पार्षदों द्वारा मौखिक व लिखित शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 तथा सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था से संबंधित अनुबंध नियमों के तहत यदि ठेकेदार निर्धारित समय में कार्य नहीं करता है तो उस पर जुर्माना, भुगतान रोके जाने तथा अनुबंध निरस्त करने तक का प्रावधान है। इसके बाद भी नियमों की खुलेआम अनदेखी नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ठेकेदार पर कार्रवाई करता है या फिर शहर के वार्ड अंधेरे में ही रहने को मजबूर रहेंगे।

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