बैकुण्ठपुर नगर पालिका क्षेत्र में प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन अभियान केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है। जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शहर के मुख्य चौक और पुराने बस स्टैंड जैसे सबसे व्यस्त इलाकों में बने सुलभ शौचालयों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि आमजन के लिए इनका उपयोग करना मजबूरी और जोखिम दोनों बन गया है।
शहर के मुख्य चौक पर स्थित सुलभ शौचालय की हालत बद से बदतर हो चुकी है। गंदगी, दुर्गंध, टूटे दरवाजे, पानी की कमी और नियमित सफाई के अभाव ने इस शौचालय को “सुलभ” की जगह “असुविधाजनक” बना दिया है। आसपास करीब 20 से 30 दुकानें संचालित हैं, जिनके दुकानदार, कर्मचारी और ग्राहक मजबूरीवश इसी शौचालय का उपयोग करते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यहां जाना लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर भीड़भाड़ रहने वाले इस क्षेत्र में शौचालय की नियमित सफाई नहीं होती। कई बार तो हफ्तों तक कोई सफाईकर्मी नजर नहीं आता। गंदे फर्श, जाम शौच सीट और बदबू से वातावरण दूषित रहता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
इस मामले पर पूर्व एल्डर मैन एवं बैकुण्ठपुर नगर पालिका के पूर्व प्रतिनिधि मोनु मांझी ने भी गंभीर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि “यही हाल शहर के अन्य इलाकों में बने शौचालयों का भी है। नगर पालिका द्वारा न तो उचित रखरखाव किया जा रहा है और न ही सफाई व्यवस्था पर कोई ठोस निगरानी है। स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।”
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर शौचालयों का निर्माण किया गया, लेकिन रखरखाव की अनदेखी ने इन योजनाओं की सार्थकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नगर पालिका समय-समय पर निरीक्षण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं करती, तो ये शौचालय बीमारियों के केंद्र बन सकते हैं।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने नगर पालिका से मांग की है कि शौचालयों की तत्काल साफ-सफाई, पानी की नियमित आपूर्ति, मरम्मत और स्थायी सफाईकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाए ताकि स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य वास्तविक रूप से धरातल पर उतर सके।
अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका बैकुण्ठपुर इन गंभीर समस्याओं पर संज्ञान लेगी, या फिर स्वच्छता अभियान यूं ही कागजों में सिमट कर रह जाएगा।




